खण्डग्रास सूर्यग्रहण:-
रविवार, 21, जून,2020 को,

स्पर्श: दिन में 10 बजकर 31 मिनट पर,
मध्य: दिन में 12 बजकर 18 मिनट पर,
मोक्ष: दिन में 02 बजकर 04 मिनट पर,
ग्रहण का ग्रासमान, 3 घंटे 33 मिनट का है।

ग्रहण सूतक:
सूर्य ग्रहण का सूतक (बेध) चार (4) प्रहर पहले अर्थात, 12 घण्टे पहले लग जाता है। शनिवार 20 जून 2020 के रात्रि 10 बजकर 31 मिनट से लगेगा, सूतक
सूतक (बेध) के समय से मोक्ष के समय तक शास्त्रीय मतानुसार मूर्ति स्पर्श, शयन,एवं भोजन नही करना चाहिए!बालक, वृद्ध,एवं रोगियों को एक ही प्रहर अर्थात प्रातः 07 बजकर 31 मिनट से ही मानना चाहिए। इस ग्रहण का फल मृगशीर्ष नक्षत्र,मिथुन राशि वालो के लिए विशेष अनिष्टकारक रहेगा,

ग्रहण के समय पालनीय कुछ बाते:।

(1) ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते । जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।

(2) सामान्य दिन से सूर्यग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना । यदि गंगा-जल पास में हो तो सूर्यग्रहण में एक करोड़ गुना फलदायी होता है ।

(3) ग्रहण-काल जप, दीक्षा, मंत्र-साधना (विभिन्न देवों के निमित्त) के लिए उत्तम काल है ।

(4) ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।

(5) सूर्यग्रहण वाले दिन ध्यान रखना चाहिए ये बातें :

सूतक के समय और ग्रहण के समय भगवान की मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए। इस दिन भगवान के नाम का जाप करते हुए दान करना चाहिए। पवित्र नदी में स्नान, हवन आदि कर्म करने से पुराने पाप नष्ट होते हैं और किस्मत का साथ मिल सकता है।

यह जानकारी मैंने शास्त्रोक्त दी है जिसकी पालना कर के आप ग्रहण के दुष प्रभाव से बच सकते है । व यह कार्य कर के इस ग्रहण का लाभ उठा सकते है ।

ज्योतिष के अनुसार ग्रहण वाले दिन कुछ खास उपाय किए जाए तो कुंडली के दोषों को दूर किया जा सकता है। ध्यान रखें सूतक काल में पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए, इसीलिए पूजा-पाठ से संबंधित उपाय सूतक से पहले करना चाहिए। किन्तु मंत्र जाप के लिए यह उपयुक्त समय होगा। आप मंत्र सिद्ध कर सकते है।

जिस जिस जातक या जातिका की कुण्डली में सूर्यग्रहण दोष है। वो भी कुछ उपाय करने से दोष खत्म कर सकते है। ग्रहण के दिन।

विभिन्न राशियों पर ग्रहण का प्रभाव …

मेष, सिंह, कन्या और मकर राशि हेतु यह ग्रहण शुभ है।
वहीं मिथुन, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के लिए यह ग्रहण अशुभ है।

वृषभ, तुला, धनु और कुम्भ राशि हेतु मिश्रित रहेगा यह ग्रहण।

बताया कि ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचने के लिए सर्वोत्तम उपाय ग्रहण काल में भगवन्नाम जप स्मरण व दान है।

सूर्य ग्रहण के दौरान सावधानियां

-गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
-सूर्य ग्रहण को आंखों पर बिना किसी सुरक्षा के नहीं देखना चाहिए।
-इस अवधि में चाकू, छुरी या तेज धार वाली वस्तुओं का प्रयोग न करें।
-ग्रहण के दौरान भोजन और पानी का सेवन न करें।
-इस समय पूजा करना और स्नान करना भी शुभ नहीं माना जाता।
-ग्रहण के दौरान आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
-ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचने के लिये महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

क्यो पङता है, सूर्यग्रहण विशेष जानकारी:

मान्यता :पौराणिक कथानुसार समुद्र मंथन के दौरान जब देवों और दानवों के साथ अमृत पान के लिए विवाद हुआ तो इसको सुलझाने के लिए मोहनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। जब भगवान विष्णु ने देवताओं और असुरों को अलग-अलग बिठा दिया। लेकिन असुर छल से देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए और अमृत पान कर लिया। देवों की लाइन में बैठे चंद्रमा और सूर्य ने राहू को ऐसा करते हुए देख लिया। इस बात की जानकारी उन्होंने भगवान विष्णु को दी, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राहू का सर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन राहू ने अमृत पान किया हुआ था, जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई और उसके सर वाला भाग राहू और धड़।ब वाला भाग केतू के नाम से जाना गया। इसी कारण राहू और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं। और अमावश्या के दिन सूर्य को ग्रस लेते हैं। इसलिए सूर्य ग्रहण होता है।

Want to know the effect of Solar eclipse on your chart? Send your birth details on ashtrologer@gmail.com or whatsapp @ 8707718561

Leave a Comment

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.